Tuesday, 7 April 2015

भगवान भरोसे है सबकुछ

नौकरी ना करी तो का करी। ये शब्द सुन कर बड़ा अजीब लगता है मन ही मन सोच रहे होगें क्या कह रहा है आप भी सुनकर आस- पास देख के हसोगे और कहोगे ये वो पल हैं जब इंन्सान को परखा जाता है इसलिए थोड़ा सब्र रखो और  अपने काम  पर ध्यान दो नौकरी तो आती जाती रहती है। तब ये कहके अपने आप को दिलासा दूंगा सब कुछ भगवान भरोसे। जो हुआ अच्छा हुआ आगे भी अच्छा होगा।
मन में ये भी ख्याल आता है कि अगर भगवान भरोसे सब कुछ छोड़ दिया तो मैं भी कहीं भगवान भरोसे न हो जाऊ और परीक्षा भी देने जाऊ तो भगवान भरोसे, काम करु तो भगवान भरोसे, खाना भी खांऊ भगवान भरोसे, पानी भी पीऊ तोे भगवान भरोसे।
फिर मन में सोचा नौकरी न लगे तो भी भगवान भरोसे। खाना न खांऊ तो भी     भगवान भरोसे, पानी न पीेऊ वो भी भगवान भरोसे हो ही जाना चाहिए। इससे कुछ भी आप समझो भईया, लेकिन अपना हाथ जगन्नाथ होता है।क्योंकि जो मजा अपनी मेहनत और हाथ में है वो कहीं और नही, अब आप बताइये कि आप किस के भरोसे।
          


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